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लद्दाख में BRO फंड गबन मामले में CBI की बड़ी कार्रवाई, असिस्टेंट इंजीनियर और दो एजेंट गिरफ्तार; कई ठिकानों पर छापेमारी

लेह, लद्दाख।
लद्दाख में सीमा सड़क संगठन (Border Roads Organisation-BRO) के फंड के कथित गबन मामले में केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए करगिल से एक असिस्टेंट इंजीनियर (सिविल) और श्रमिक उपलब्ध कराने वाले दो एजेंटों को गिरफ्तार किया है। यह कार्रवाई रक्षा मंत्रालय की शिकायतों के आधार पर दर्ज मामलों की जांच के दौरान की गई है। मामले को लेकर सीबीआई ने व्यापक स्तर पर जांच शुरू कर दी है।

सीबीआई के अनुसार, गिरफ्तार असिस्टेंट इंजीनियर की तैनाती खात्से-बटालिक सेक्टर में प्रभारी अधिकारी के रूप में थी। जांच में आरोप है कि उन्होंने दो श्रमिक आपूर्ति एजेंटों के साथ मिलकर फर्जी मजदूरों के नाम पर भुगतान स्वीकृत कराया। एजेंसी का कहना है कि जिन मजदूरों के नाम पर भुगतान दिखाया गया, वे वास्तविक रूप से कार्यस्थल पर मौजूद नहीं थे। इस कथित साजिश के जरिए सरकारी धन का गबन किया गया।

जांच एजेंसी का दावा है कि फर्जी भुगतान के माध्यम से निकाली गई राशि बाद में एजेंटों द्वारा कथित तौर पर असिस्टेंट इंजीनियर के बैंक खाते में जमा कराई गई। सीबीआई अब बैंक खातों, वित्तीय लेन-देन, भुगतान रिकॉर्ड और अन्य दस्तावेजों की गहन जांच कर रही है, ताकि कथित गबन की पूरी राशि और इसमें शामिल सभी लोगों की भूमिका का पता लगाया जा सके।

इन गिरफ्तारियों से एक दिन पहले सीबीआई ने बीआरओ की विभिन्न परियोजनाओं में कथित वित्तीय अनियमितताओं के संबंध में चार अलग-अलग एफआईआर दर्ज की थीं। इसके साथ ही लद्दाख और पड़ोसी राज्य हिमाचल प्रदेश सहित कुल 26 स्थानों पर तलाशी अभियान चलाया गया। छापेमारी के दौरान कई महत्वपूर्ण दस्तावेज, डिजिटल रिकॉर्ड, बैंक संबंधी जानकारी और अन्य साक्ष्य एकत्र किए गए हैं।

सीबीआई ने बताया कि गिरफ्तार तीनों आरोपितों को संबंधित अदालत में पेश किया जाएगा और आवश्यक होने पर उनकी पुलिस रिमांड की मांग की जाएगी। जांच एजेंसी यह भी पता लगाने का प्रयास कर रही है कि इस कथित फंड गबन में अन्य अधिकारी, कर्मचारी, ठेकेदार या निजी व्यक्ति भी शामिल थे या नहीं। यदि जांच के दौरान किसी अन्य व्यक्ति की भूमिका सामने आती है तो उसके खिलाफ भी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

सीबीआई ने फिलहाल मामले की जांच जारी होने का हवाला देते हुए विस्तृत जानकारी साझा नहीं की है। एजेंसी का कहना है कि सभी आरोपों की जांच दस्तावेजी साक्ष्यों और वित्तीय रिकॉर्ड के आधार पर की जा रही है। अदालत में दोष सिद्ध होने तक गिरफ्तार सभी आरोपित कानूनी रूप से निर्दोष माने जाएंगे। जांच पूरी होने के बाद ही इस कथित घोटाले की पूरी तस्वीर और वास्तविक जिम्मेदारियों का स्पष्ट खुलासा हो सकेगा।

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