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केरल में हब-एंड-स्पोक मॉडल के जरिए स्ट्रोक उपचार नेटवर्क को मजबूत करने पर विचार

केरल में कोविड-19 के बाद स्ट्रोक मामलों में वृद्धि पर स्वास्थ्य मंत्री ने अपनी बात रखी

तिरुवनंतपुरम। राज्य विधानसभा में एक कॉलिंग अटेंशन मोशन के जवाब में केरल के स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि कोविड-19 महामारी के बाद स्ट्रोक के मामले राज्य में बढ़ते हुए देखे जा रहे हैं। हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि अभी इस बढ़ोत्तरी के कारणों को पूरी तरह समझने के लिए और अधिक क्लिनिकल अध्ययन की आवश्यकता है।

स्वास्थ्य मंत्री ने बताया कि राज्य में स्ट्रोक उपचार को बेहतर बनाने के लिए हब-एंड-स्पोक मॉडल पर काम किया जा रहा है, जिसका उद्देश्य यह है कि प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों तक विशेषज्ञता और उपचार सुगमता से पहुंच सके। इसके तहत बड़े अस्पतालों (हब) को केंद्र बनाया जाएगा और आसपास के छोटे अस्पतालों और क्लीनिक्स (स्पोक) को उससे जोड़ा जाएगा ताकि कामकाज में समन्वय और कुशलता बढ़े।

उन्होंने कहा कि कोविड-19 के बाद स्ट्रोक के मामलों में वृद्धि स्पष्ट रूप से सामने आ रही है, लेकिन इसके पीछे सटीक कारण क्या हैं, यह जानने के लिए विस्तृत चिकित्सा शोध आवश्यक है। प्रारंभिक रिपोर्टों के अनुसार वायरस संक्रमण के कारण शरीर में रक्त संचार और तंत्रिका तंत्र पर प्रभाव पड़ सकता है, जिससे स्ट्रोक का जोखिम बढ़ सकता है। लेकिन इस विषय में पुष्टि के लिए व्यापक डेटा और विश्लेषण की जरूरत है।

स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि सरकार ने राज्य में स्ट्रोक उपचार सुविधाओं को मजबूत करने के लिए आवश्यक कदम उठाए हैं। इसमें प्राथमिक चिकित्सा से लेकर त्वरित रिफरल सिस्टम बनाए जाने, अस्पतालों में विशेषज्ञ डॉक्टरों की संख्या बढ़ाने, और रोगियों को समय पर उचित इलाज मुहैया कराने पर जोर दिया गया है। साथ ही, स्ट्रोक के प्रति जागरूकता कार्यक्रम भी चलाए जा रहे हैं ताकि लोगों में इसके लक्षणों की समझ बढ़े और समय पर उपचार हो सके।

साथ ही उन्होंने यह भी जोड़ा कि कोविड-19 की जटिलताओं को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग लगातार डेटा संग्रह और रोग नियंत्रण पर ध्यान दे रहा है, ताकि भविष्य में ऐसी स्वास्थ्य चुनौतियों का बेहतर प्रबंधन किया जा सके। उन्होंने विशेषज्ञ चिकित्सा समुदाय से भी अनुरोध किया कि वे इस महत्वपूर्ण मुद्दे पर ज्यादा-से-ज्यादा शोध करें ताकि वैज्ञानिक दृष्टिकोण से सही समाधान निकाला जा सके।

अंत में उन्होंने आश्वासन दिया कि सरकार इस क्षेत्र में हर संभव सहायता प्रदान करेगी और चिकित्सा समुदाय तथा जनता के बीच समन्वय बढ़ाकर स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार लाने का प्रयास जारी रहेगा।

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