NATIONAL

ममता बनर्जी ने कहा: तृणमूल विधायकों को धमकियां, पार्टी बैठक में शामिल होने से रोक रही हैं बाधाएं

कोलकाता: तृणमूल कांग्रेस (TMC) की प्रमुख और पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने रविवार को आरोप लगाया कि पार्टी के कुछ विधायकों को धमकियां मिल रही हैं और उन्हें पार्टी की बैठकों में शामिल होने से रोका जा रहा है। यह बयान ऐसे समय में आया है जब पार्टी के एक अहम बैठक में केवल एक चौथाई विधायकों ने भाग लिया, जिसके कारण बैठक को निरस्त करना पड़ा।

ममता ने अपने बयान में कहा कि यह स्थिति पार्टी के अंदर असमंजस और विभिन्न वर्गों के मध्य मतभेदों को प्रतिबिंबित करती है। उन्होंने ये भी कहा कि तृणमूल कांग्रेस एकजुट रहकर ही आगे बढ़ सकती है। “विधायकों को धमकाना या बैठक में आने से रोकना अनुचित है और इससे पार्टी की साख प्रभावित होती है,” ममता ने कहा।

इस घटना के एक दिन बाद ही ममता का यह बयान आया है, जब पार्टी की एक महत्वपूर्ण बैठक में कुल 148 विधायकों में से केवल लगभग 37 ही उपस्थित हुए थे। पार्टी सूत्रों के अनुसार, विधायकों की इस कम उपस्थिति के पीछे कई कारण बताए जा रहे हैं जिनमें आंतरिक कलह और रणनीतिक मतभेद शामिल हैं।

पार्टी के मुखपत्रों ने भी इस मामले में चुप्पी साधे रखी है, लेकिन पार्टी के गौरव गोगोई और कुछ अन्य वरिष्ठ नेताओं ने मुलाकात के माध्यम से स्थिति को सुधारने की कोशिशें तेज कर दी हैं।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस घटना ने तृणमूल कांग्रेस के आंतरिक गठबंधन में खींचतान को उजागर कर दिया है, जो आगामी विधानसभा चुनावों के लिए चिंता का विषय हो सकता है। विपक्षी दलों ने भी इस मुद्दे को लेकर तृणमूल कांग्रेस को आड़े हाथों लिया है और कहा कि पार्टी को अपने आंतरिक मामलों को सुलझाने की जरूरत है।

ममता बनर्जी ने स्पष्ट किया कि पार्टी अपने संगठन को मजबूत बनाने के लिए सभी जरूरी कदम उठाएगी और विधायकों के बीच एकता कायम रखना उसकी प्राथमिकता है। उन्होंने यह भी आश्वासन दिया कि आने वाले दिनों में सभी विधायकों की समस्याओं का ध्यान रखा जाएगा और किसी भी तरह की धमकियों या बाहरी दखलअंदाजी को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

यह घटना पश्चिम बंगाल की राजनीतिक परिदृश्य में एक नया मोड़ है, जहां पार्टी के अन्दर गतिरोध और असंतोष की खबरें सामने आ रही हैं, जिन्हें गंभीरता से लिया जा रहा है। आगामी समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि तृणमूल कांग्रेस इस चुनौती का सामना कैसे करती है और अपनी राजनीतिक स्थिति को कैसे मजबूत बनाती है।

Source

Related Articles

Back to top button