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अमेरिकी टीम 1-4 जून को भारत पहुंचेगी, अंतरिम व्यापार समझौते के विवरण तय करने के लिए

अमेरिकी व्यापार टीम 1 से 4 जून के बीच भारत का दौरा करेगी

नई दिल्ली: संयुक्त राज्य अमेरिका की एक उच्च स्तरीय टीम जून के पहले सप्ताह में भारत का दौरा करेगी ताकि दोनों देशों के बीच अंतरिम व्यापार समझौते के अंतिम विवरणों पर विचार-विमर्श किया जा सके। यह दौरा 1 से 4 जून के बीच होगा, जिसमें अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल भारत के शीर्ष व्यापार अधिकारियों से मुलाकात करेगा।

व्यापार और वाणिज्य मंत्रालय के सूत्रों के अनुसार, इस चर्चा का मुख्य केंद्र बिंदु अमेरिका द्वारा भारत के प्रतिस्पर्धियों पर लगाए जाने वाले आयात शुल्क के संदर्भ में स्पष्टता प्रदान करना है। भारतीय वाणिज्य मंत्री, पीयूष गोयल, ने पहले ही यह साफ़ कर दिया है कि जब तक इस आयात शुल्क और टैरिफ को लेकर असमंजस दूर नहीं होगा, तब तक कोई समझौता संभव नहीं होगा।

भारतीय पक्ष का मानना है कि अमेरिका की ये टैरिफ योजनाएं भारत के व्यापारिक हितों को प्रभावित कर सकती हैं, खासकर उन क्षेत्रों में जहां भारत की प्रतिस्पर्धा अन्य देशों के साथ होती है। यही कारण है कि दोनों देशों के बीच इस मुद्दे पर व्यापक बातचीत होनी आवश्यक मानी जा रही है।

व्यापार विशेषज्ञों का मानना है कि यह दौरा दोनों देशों के आर्थिक और व्यापारिक रिश्तों को और मजबूत करने में मदद करेगा। जुलाई में होने वाले अगले व्यापार वार्ता दौर से पहले यह समझौता तैयार होना महत्वपूर्ण है ताकि दोनों पक्ष आगे की रणनीति पर सहमत हो सकें।

बीते कुछ सालों में भारत और अमेरिका के बीच व्यापारिक रिश्तों में कई उतार-चढ़ाव देखे गए हैं, लेकिन दोनों देश आर्थिक सहयोग बढ़ाने के मूड में हैं। इस बार की बैठक उम्मीद के अनुसार पारदर्शिता बढ़ाएगी और दोनों देशों के बीच विश्वास स्थापित करेगी।

वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने कहा है कि भारत हर स्थिति में अपने हितों की रक्षा करेगा और ऐसे समझौते पर ही सहमति देगा जो दोनों पक्षों के लिए लाभकारी हों। उन्होंने अमेरिकी टीम के दौरे को एक सकारात्मक पहल बताया है जो द्विपक्षीय व्यापार में नई दिशा दे सकता है।

इस बीच, व्यापार संगठनों ने भी इस विकास को स्वागत योग्य बताया है और उम्मीद जताई है कि जल्द ही दोनों देशों के बीच एक संतुलित और पारदर्शी अंतरिम व्यापार समझौता होगा, जो घरेलू उद्योगों को मजबूत करेगा और निर्यात को बढ़ावा देगा।

आगामी दौर की वार्ता और अमेरिकी टीम के भारत दौरे पर सभी की निगाहें टिकी हैं, जो दोनों देशों की आर्थिक साझेदारी की दिशा तय कर सकते हैं।

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