विश्व रक्त कैंसर दिवस: विशेषज्ञों ने भारत में डोनर की कमी पर उठाया प्रश्न, स्टेम सेल डोनर रजिस्ट्री को मजबूत करने की अपील

नई दिल्ली: विश्व रक्त कैंसर दिवस के अवसर पर विशेषज्ञों ने भारत में रक्त स्टेम सेल डोनर पंजीकरण की कमी पर चिंता व्यक्त की है। जबकि महानगरीय शहरों में रक्त स्टेम सेल दान के प्रति जागरूकता में सुधार हुआ है, दूसरी ओर टियर-2, टियर-3 शहरों और ग्रामीण क्षेत्रों से डोनर रजिस्ट्रेशन की दर अब भी बहुत कम बनी हुई है।
डॉक्टरों और हेमेटोलॉजिस्टों का कहना है कि रक्त कैंसर जैसे गंभीर रक्त रोगों से जूझ रहे मरीजों के लिए स्टेम सेल डोनेशन एक महत्त्वपूर्ण इलाज का विकल्प है। लेकिन यदि डोनर रजिस्ट्री मजबूत नहीं होगी तो मरीजों को सही मैच पाना कठिन हो जाएगा। विशेषज्ञों का यह भी सुझाव है कि सरकार और निजी स्तर पर समुदायों में जागरूकता कार्यक्रमों को तीव्र रूप से बढ़ाने की जरूरत है ताकि प्रति क्षेत्र डोनर संख्या बढ़ाई जा सके।
विशेषज्ञों ने बताया कि महानगरों में स्वास्थ्य सुविधाओं और सूचनाओं तक पहुंच ज्यादा होने के कारण रक्त स्टेम सेल दान के महत्व को लेकर जानकारी पहुंची है। वहीं, छोटे शहरों और गांवों में अभी यह जागरूकता सीमित है। सामाजिक, सांस्कृतिक और आर्थिक बाधाएं भी डोनरों की संख्या को प्रभावित करती हैं।
इस विषय पर hematology विशेषज्ञ डॉ. अनिल कुमार ने कहा, “जब तक भारत में विभिन्न इलाकों, विशेषकर ग्रामीण और पिछड़े क्षेत्रों से पर्याप्त संख्या में डोनर जुड़ेंगे नहीं, तब तक रक्त स्टेम सेल डोनर रजिस्ट्री में संतुलन बनाना मुश्किल होगा। हमें समग्र ग्रामीण क्षेत्रों में स्थाई जागरूकता अभियान चलाने होंगे।”
साथ ही, रक्त कैंसर के मरीजों तथा उनके परिवारों को स्टेम सेल दान प्रक्रिया की जानकारी देकर भय और संदेह दूर करना भी आवश्यक है। विशेषज्ञ आग्रह करते हैं कि रक्त स्टेम सेल दान उतना ही सुरक्षित और दर्द रहित प्रक्रिया है जितना रक्तदान।
सरकार ने भी इस दिशा में कई पहलें शुरू की हैं, जिनमें मोबाइल कैंप आयोजित करना और टियर-2 तथा टियर-3 शहरों में रक्त स्टेम सेल डोनर रजिस्ट्री केंद्र खोलना शामिल है। इन पहलों के सफल क्रियान्वयन से डोनर संख्या में धीरे-धीरे वृद्धि देखी जा सकती है।
अंततः देशभर में रक्त स्टेम सेल दान के प्रति लोगों की सोच बदलने और उन्हें स्वेच्छा से इस जीवनदायिनी प्रक्रिया में जुड़ने के लिए सामूहिक प्रयास अत्यंत आवश्यक हैं, जिससे अधिक से अधिक मरीजों को उचित उपचार मिल सके और रक्त कैंसर जैसी गंभीर बिमारियों पर विजय पाई जा सके।



