भारत-चीन संबंध: फार्मा निर्यात और निवेश से मजबूत होंगे आर्थिक रिश्ते, राजदूत विक्रम दोरईस्वामी का बड़ा बयान

नई दिल्ली, दिल्ली
भारत और चीन के बीच आर्थिक संबंधों को नई मजबूती देने के लिए चीन में भारत के राजदूत विक्रम दोरईस्वामी ने भारतीय फार्मा उत्पादों के लिए चीनी बाजार खोलने और भारत में चीनी निवेश बढ़ाने की आवश्यकता पर जोर दिया है। उनका मानना है कि इन कदमों से दोनों देशों के बीच आर्थिक सहयोग बढ़ेगा और द्विपक्षीय संबंधों को नई दिशा मिलेगी।
विश्व शांति मंच (वर्ल्ड पीस फोरम) के दौरान राजदूत दोरईस्वामी ने कहा कि भारत फार्मास्यूटिकल्स सहित कई क्षेत्रों में वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी क्षमता रखता है। यदि चीन भारतीय दवाइयों और अन्य उत्पादों के लिए अपने बाजार को अधिक खुला बनाता है, तो दोनों देशों को इसका लाभ मिलेगा।
उन्होंने यह भी कहा कि भारत में चीनी निवेश बढ़ने से उद्योग, रोजगार और आर्थिक सहयोग को गति मिलेगी। इससे दोनों देशों के बीच विश्वास बढ़ाने में भी मदद मिलेगी।
वित्तीय वर्ष 2025-26 के आंकड़ों के अनुसार चीन अमेरिका को पीछे छोड़ते हुए भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार बन चुका है। दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार 151.1 अरब डॉलर तक पहुंच गया है। हालांकि इसके साथ भारत का व्यापार घाटा भी बढ़कर 112.16 अरब डॉलर के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है, जो चिंता का विषय बना हुआ है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि भारतीय निर्यात, खासकर फार्मा और उच्च गुणवत्ता वाले उत्पादों की चीन में पहुंच बढ़ती है, तो व्यापार असंतुलन को कम करने में मदद मिल सकती है। आने वाले समय में दोनों देशों की व्यापारिक नीतियों पर बाजार की नजर बनी रहेगी।




