Heat and humidity of India’s monsoon may increase effect of heat stress: Study

एक नवीनतम अध्ययन में पता चला है कि आगामी वर्षों में भारत में मानसून के दौरान गर्मी और आर्द्रता के स्तर में वृद्धि से गर्मी से उत्पन्न तनाव के प्रभाव फैल सकते हैं। यह तनाव विशेषकर उन लोगों के लिए खतरनाक हो सकता है, जिन्हें सीधे राहत नहीं मिलती। अध्ययन के अनुसार, आने वाले जलवायु परिवर्तन के कारण लगभग 0.8 से 1.2 अरब लोग इस संक्रमणकारी गर्मी तनाव से प्रभावित हो सकते हैं।
विभिन्न वैश्विक तापमान वृद्धि परिदृश्यों के आधार पर की गई इस गणना में शोध दल ने मानव स्वास्थ्य पर पड़ने वाले प्रभावों का विश्लेषण किया। यह संख्याएं उस समय की अनुमानित जनसंख्या पर आधारित हैं, जब विश्व तापमान में वृद्धि अगले दशकों में बढ़ेगी। विशेषज्ञों का मानना है कि भारत जैसे उष्णकटिबंधीय देशों में मानसूनी मौसम में आर्द्रता के साथ मिलकर गर्मी का प्रभाव और भी गंभीर हो जाता है।
विशेषज्ञों ने कहा कि यह अध्ययन नीति निर्माताओं और जलवायु कार्यकर्ताओं के लिए चेतावनी के रूप में काम करेगा। गर्मी से उत्पन्न स्वास्थ्य संकट को कम करने के लिए तत्काल प्रभावी उपायों की आवश्यकता है। अतिरिक्त गर्मी और आर्द्रता के कारण होने वाले गर्मी तनाव से बचाव के लिए बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं, सार्वजनिक जागरूकता और कड़े पर्यावरणीय नियम जरूरी हैं।
शोध दल ने सुझाव दिया है कि सरकारी और गैर-सरकारी संस्थाएं मिलकर जनसंख्या के कमजोर वर्गों के लिए ठोस योजनाएं तैयार करें। जिन क्षेत्रों में मानसून के दौरान तापमान और आर्द्रता दोगुनी तेजी से बढ़ेगी वहां लोगों को विशेष सतर्कता अपनानी होगी। इसी आधार पर भविष्य में आयोजित स्वास्थ्य अभियानों और संसाधनों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।
जलवायु विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि यदि वैश्विक तापमान में वृद्धि को नियंत्रित नहीं किया गया तो गर्मी से जुड़ी स्वास्थ्य संबंधी परेशानियां भारत के लिए एक गंभीर सार्वजनिक स्वास्थ्य चुनौती बन सकती हैं। यह न केवल आर्थिक विकास को प्रभावित करेगा बल्कि जनसंख्या की जीवन गुणवत्ता पर भी विपरीत प्रभाव डालेगा।
इस अध्ययन ने तापमान में वृद्धि के परिणामस्वरूप बढ़ते स्वास्थ्य खतरों को उजागर किया है, जिसमें गर्मी से हो सकने वाली अप्रत्यक्ष मौतें और रोग दोनों शामिल हैं। शोधकर्ता आगे यह भी कह रहे हैं कि मानसून के दौरान बढ़ती आर्द्रता के कारण शरीर की गर्मी सहन करने की क्षमता कम हो जाएगी, जिससे अत्यधिक संख्या में लोग स्वास्थ्य जोखिमों के शिकार होंगे।
इस संदर्भ में आवश्यक है कि देश के विकास और पर्यावरण नीतियों को एक साथ लेकर चलें ताकि जलवायु परिवर्तन से जुड़ी स्वास्थ्य समस्याओं का प्रभावी समाधान निकाला जा सके। मानसूनी मौसम में गर्मी और आर्द्रता के मेल से उत्पन्न चुनौतियों का मुकाबला करने के लिए व्यापक जनचेतना अभियान और वैज्ञानिक अनुसंधान आवश्यक हैं।




