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Reserve Bank of India and its growing financial role

नई दिल्ली: भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने वित्त मंत्रालय को रिकॉर्ड ₹2.87 लाख करोड़ का अधिशेष हस्तांतरण किया है, जो इस बात का संकेत है कि RBI की वित्तीय भूमिका देश की अर्थव्यवस्था में तेजी से बढ़ रही है। यह बड़ी राशि रिजर्व प्रबंधन और विदेशी संपत्तियों से होने वाली आय का नतीजा है, जो सीधे सरकार की वित्तीय स्थिति को मजबूत कर रही है।

RBI का यह रिकॉर्ड हस्तांतरण सरकार की केंद्रीय वित्तीय जरूरतों को पूरा करने में अहम भूमिका निभा रहा है। पिछले कुछ वर्षों में, रिजर्व बैंक ने अपनी कमाई का एक बड़ा हिस्सा केंद्र सरकार को हस्तांतरित किया है, जिससे वित्तीय संसाधनों में वृद्धि हुई है। हालांकि, इस बढ़ती वित्तीय भागीदारी ने सवाल उठाए हैं कि कहीं इसका प्रभाव केंद्रीय बैंक की स्वतंत्रता पर तो नहीं पड़ रहा है।

निजी और सार्वजनिक विशेषज्ञों ने इस प्रवृत्ति को लेकर चिंता जताई है कि इससे वित्तीय केंद्रीकरण बढ़ सकता है तथा राज्यों को मिलने वाले वित्तीय संसाधनों में कमी आ सकती है। चूंकि RBI से होने वाले इन ट्रांसफर को राज्यों के बजट आवंटन (फिस्कल डिवोल्यूशन) में शामिल नहीं किया जाता, इसलिए इससे राज्यों की वित्तीय स्वायत्तता प्रभावित हो सकती है।

एक वरिष्ठ अर्थशास्त्री ने बताया, “RBI का इतना बड़ा अधिशेष केंद्र सरकार को प्रदान करना केंद्रीय वित्त की बढ़ती भूमिका को दर्शाता है, लेकिन इसे संतुलित करना जरूरी है ताकि राज्यों की वित्तीय योग्यता बनी रहे।” इतना ही नहीं, RBI की अपनी नीतिगत स्वतंत्रता भी इस वित्तीय सहभागिता के कारण चर्चा में आई है।

विशेषज्ञों का मानना है कि केंद्रीय बैंक की मौद्रिक नीति को आर्थिक विकास के साथ-साथ वित्तीय स्वतंत्रता का भी ध्यान रखना चाहिए। RBI की विदेशी संपत्तियों से होने वाली आय सरकार के वित्तीय प्रबंधन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुकी है, जो सार्वजनिक निवेश और योजनाओं के लिए पूंजी उपलब्ध कराती है।

सरकार की वित्तीय जरूरतों को पूरा करने में RBI के इस बढ़ते योगदान से जहां आर्थिक स्थिरता बनी रहती है, वहीं इसे लेकर नीति निर्माताओं को संतुलन साधना होगा ताकि राज्यों और केंद्र के बीच वित्तीय संबंध समतामूलक ढंग से चल सकें। यह विषय भविष्य में देश की वित्तीय नीतियों के लिए गंभीर चर्चा का विषय बना रहेगा।

संक्षेप में, RBI का ₹2.87 लाख करोड़ का अधिशेष हस्तांतरण न केवल उसकी वित्तीय मजबूती को दर्शाता है, बल्कि देश की आर्थिक योजना और केंद्रीय बैंक की भूमिका में एक महत्वपूर्ण बदलाव भी लेकर आ रहा है, जिसे सावधानी और रणनीति के साथ संचालित करने की आवश्यकता है।

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