क्या आपका बच्चा भी होमवर्क के लिए AI का ले रहा है सहारा? पेरेंट्स इन आसान तरीकों से सुधार सकते हैं यह आदत

नई दिल्ली, दिल्ली
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के बढ़ते उपयोग ने पढ़ाई के तरीके को काफी बदल दिया है। जहां यह तकनीक सीखने और जानकारी जुटाने का बेहतर माध्यम बन रही है, वहीं कई बच्चे होमवर्क और स्कूल प्रोजेक्ट पूरे करने के लिए पूरी तरह AI पर निर्भर होने लगे हैं। शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इस आदत पर समय रहते ध्यान नहीं दिया गया, तो बच्चों की रचनात्मक सोच और स्वयं सीखने की क्षमता प्रभावित हो सकती है।
विशेषज्ञों के अनुसार, आज बोर्ड परीक्षाओं और अच्छे अंकों की प्रतिस्पर्धा के कारण कई बच्चे पढ़ाई को सीखने की बजाय केवल अंक हासिल करने का माध्यम मानने लगे हैं। ऐसे में वे ChatGPT और अन्य AI टूल्स की मदद से बिना मेहनत किए असाइनमेंट पूरा करने का आसान रास्ता चुन लेते हैं।
मनोवैज्ञानिकों का कहना है कि माता-पिता को बच्चों की तुलना दूसरे बच्चों से करने के बजाय उनकी मेहनत और ईमानदारी की सराहना करनी चाहिए। जब बच्चे को यह महसूस होगा कि उसके प्रयास को महत्व दिया जा रहा है, तो वह शॉर्टकट अपनाने से बचेगा।
विशेषज्ञ घर में एक सरल नियम बनाने की भी सलाह देते हैं कि कोई भी प्रोजेक्ट या निबंध पहले कागज पर अपने हाथ से लिखा जाए और उसके बाद ही उसे कंप्यूटर पर तैयार किया जाए। इससे बच्चों की लिखने की क्षमता, समझ और रचनात्मक सोच विकसित होती है।
शिक्षाविदों का मानना है कि AI का उपयोग पूरी तरह रोकना संभव नहीं है, लेकिन बच्चों को इसे केवल सीखने और मार्गदर्शन के साधन के रूप में इस्तेमाल करना सिखाना जरूरी है। सही मार्गदर्शन और संतुलित उपयोग से AI बच्चों की पढ़ाई में सहायक बन सकता है, न कि उनकी मेहनत का विकल्प।



