पीएम मोदी की इंडोनेशिया यात्रा से भारत-इंडोनेशिया संबंधों को मिलेगी नई दिशा, रक्षा, डिजिटल भुगतान और क्रिटिकल मिनरल्स पर रहेगा फोकस

नई दिल्ली, दिल्ली
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तीन दिवसीय इंडोनेशिया यात्रा भारत और इंडोनेशिया के बीच रणनीतिक, आर्थिक और तकनीकी सहयोग को नई मजबूती देने वाली मानी जा रही है। इस यात्रा के दौरान दोनों देशों के शीर्ष नेतृत्व के बीच डिजिटल भुगतान प्रणाली, रक्षा सहयोग, समुद्री सुरक्षा, स्वास्थ्य, डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर और महत्वपूर्ण खनिजों (क्रिटिकल मिनरल्स) जैसे कई अहम विषयों पर व्यापक चर्चा होगी। माना जा रहा है कि इस दौरे से दोनों देशों के द्विपक्षीय संबंधों को नई गति मिलेगी।
यात्रा का सबसे महत्वपूर्ण पहलू भारत के यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (यूपीआई) और इंडोनेशिया की क्यूआरआईएस (QRIS) भुगतान प्रणाली के बीच डिजिटल लिंकेज स्थापित करना है। इस व्यवस्था के लागू होने के बाद भारतीय पर्यटक और कारोबारी इंडोनेशिया में आसानी से डिजिटल भुगतान कर सकेंगे। इससे लेनदेन अधिक तेज, सुरक्षित और कम लागत वाला होगा। दोनों देशों के बीच पर्यटन और व्यापार को भी इसका सीधा लाभ मिलने की उम्मीद है।
सूत्रों के अनुसार, इंडोनेशिया भारत के डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर मॉडल से प्रभावित है। आधार, यूपीआई, डिजिलॉकर और ई-केवाईसी जैसी भारतीय व्यवस्थाओं के अनुभवों को वहां अपनाया जा रहा है। इंडोनेशिया का ओपन नेटवर्क (ION) भी भारत के ओएनडीसी मॉडल से प्रेरित बताया जाता है। प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति प्राबोवो सुबियांटो की बैठक के दौरान आईओएन का पहला लाइव ट्रांजैक्शन किए जाने की तैयारी है, जिससे लाखों सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों को डिजिटल कारोबार का नया मंच मिलेगा।
रक्षा क्षेत्र में भी दोनों देशों के बीच सहयोग बढ़ाने पर विशेष जोर रहेगा। रक्षा विनिर्माण, तकनीकी हस्तांतरण, सैन्य प्रशिक्षण, समुद्री सुरक्षा और हिंद-प्रशांत क्षेत्र में संयुक्त अभ्यास जैसे मुद्दों पर विस्तृत चर्चा होगी। भारत के स्वदेशी रक्षा उत्पादन और ब्रह्मोस जैसी आधुनिक रक्षा प्रणालियों को लेकर भी सहयोग की संभावनाओं पर विचार किया जा सकता है।
इसके अलावा स्वास्थ्य और सामाजिक विकास के क्षेत्र में भारत की पीएम पोषण योजना तथा जन औषधि मॉडल के अनुभव साझा किए जाएंगे। वहीं ऊर्जा परिवर्तन और इलेक्ट्रिक वाहन उद्योग की जरूरतों को देखते हुए निकल सहित महत्वपूर्ण खनिजों की आपूर्ति और प्रसंस्करण में सहयोग बढ़ाने पर भी चर्चा होगी। इंडोनेशिया के विशाल खनिज भंडार और भारत की औद्योगिक मांग दोनों देशों के बीच दीर्घकालिक रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यह यात्रा व्यापार, निवेश, तकनीकी सहयोग और क्षेत्रीय सुरक्षा के लिहाज से भारत-इंडोनेशिया संबंधों के लिए एक महत्वपूर्ण पड़ाव साबित हो सकती है।




