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PoK में पाकिस्तान विरोधी आंदोलन तेज, प्रदर्शनकारी बोले- ‘हम आजाद नहीं, कब्जे में रह रहे हैं’

रावलकोट, पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK)

पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) में पिछले कई सप्ताह से जारी विरोध प्रदर्शन अब और अधिक उग्र हो गए हैं। आंदोलन से जुड़े नेताओं का कहना है कि क्षेत्र के लोग लंबे समय से राजनीतिक अधिकारों, आर्थिक बदहाली और प्रशासनिक दमन के खिलाफ आवाज उठा रहे हैं। हालिया घटनाक्रम में आंदोलन के प्रमुख नेताओं में शामिल सरदार अमान खान ने एक जनसभा के दौरान पाकिस्तान की नीतियों पर तीखा हमला बोला और क्षेत्र की स्थिति को “कब्जे वाली जमीन” बताया।

रावलकोट में आयोजित एक बड़ी रैली में हजारों लोग शामिल हुए। सभा को संबोधित करते हुए सरदार अमान खान ने कहा कि PoK को “आज़ाद” बताने का दावा वास्तविक परिस्थितियों से मेल नहीं खाता। उनके अनुसार, स्थानीय नागरिक वर्षों से अपने बुनियादी अधिकारों और संसाधनों के लिए संघर्ष कर रहे हैं तथा उन्हें पर्याप्त राजनीतिक और आर्थिक प्रतिनिधित्व नहीं मिल रहा है। उनके भाषण के दौरान भीड़ ने पाकिस्तान विरोधी नारे भी लगाए।

रिपोर्टों के अनुसार, क्षेत्र में चल रहे आंदोलन के दौरान कई स्थानों पर सुरक्षा बलों और प्रदर्शनकारियों के बीच टकराव की घटनाएं सामने आई हैं। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि प्रशासन ने आंदोलन को दबाने के लिए बल प्रयोग, गिरफ्तारियां और संचार प्रतिबंध जैसे कदम उठाए हैं। वहीं पाकिस्तान की ओर से इन आरोपों पर अलग-अलग स्तर पर प्रतिक्रिया दी गई है।

सरदार अमान खान ने अपने संबोधन में अंतरराष्ट्रीय समुदाय से भी स्थिति पर ध्यान देने की अपील की। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार उन्होंने भारत सहित वैश्विक समुदाय से मानवीय दृष्टिकोण अपनाने और क्षेत्र के लोगों की आवाज को अंतरराष्ट्रीय मंचों तक पहुंचाने की बात कही।

इस बीच भारत ने भी हाल के दिनों में PoK की स्थिति पर चिंता व्यक्त की है। विदेश मंत्रालय ने कहा है कि क्षेत्र में सामने आ रहे विरोध प्रदर्शन वहां के लोगों के असंतोष को दर्शाते हैं और अंतरराष्ट्रीय समुदाय को इस घटनाक्रम पर ध्यान देना चाहिए। भारत लगातार यह दोहराता रहा है कि जम्मू-कश्मीर का पूरा क्षेत्र उसका अभिन्न अंग है और पाकिस्तान के कब्जे वाले हिस्से में रहने वाले लोगों के अधिकारों का सम्मान किया जाना चाहिए।

विश्लेषकों का मानना है कि यदि आंदोलन इसी तरह जारी रहा तो पाकिस्तान के सामने राजनीतिक और प्रशासनिक चुनौतियां और बढ़ सकती हैं। फिलहाल पूरे घटनाक्रम पर अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजर बनी हुई है और आने वाले दिनों में स्थिति किस दिशा में जाती है, इस पर सभी की निगाहें टिकी हैं।

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