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एशियन गेम्स 2026 चयन विवाद सुप्रीम कोर्ट पहुंचा, घुड़सवारों की याचिका पर जल्द सुनवाई; फैसले पर टिकी निगाहें

नई दिल्ली, दिल्ली।
जापान में आयोजित होने वाले एशियन गेम्स 2026 के लिए भारतीय घुड़सवारी (ड्रेसाज) टीम के चयन को लेकर जारी विवाद अब सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है। टीम में शामिल नहीं किए जाने के खिलाफ राइडर्स अनुष अग्रवाल और सुदीप्ति हजेला द्वारा दायर याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने जल्द सुनवाई करने की सहमति दे दी है। मामले की अगली सुनवाई गुरुवार को होगी।

मंगलवार को जस्टिस अहसानुद्दीन अमानुल्लाह और जस्टिस शील नागू की पीठ के समक्ष याचिका का उल्लेख किया गया। याचिकाकर्ताओं की ओर से अदालत को बताया गया कि एशियन गेम्स के लिए अंतिम टीम चयन 15 जुलाई तक पूरा किया जाना है। ऐसे में समय पर सुनवाई न होने की स्थिति में याचिकाकर्ताओं को अपूरणीय नुकसान हो सकता है।

इस पर सुप्रीम कोर्ट ने मामले की तात्कालिकता को स्वीकार करते हुए गुरुवार को सुनवाई करने की बात कही। साथ ही अदालत ने निर्देश दिया कि याचिका को उचित पीठ के समक्ष सूचीबद्ध किया जाए। अदालत ने फिलहाल मामले के तथ्यों या चयन प्रक्रिया की वैधता पर कोई टिप्पणी नहीं की है।

इससे पहले 6 जुलाई को दिल्ली हाई कोर्ट की खंडपीठ ने इस मामले में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया था। हाई कोर्ट ने एकल न्यायाधीश के फैसले को बरकरार रखते हुए दोनों खिलाड़ियों को राहत देने से मना कर दिया था। इसके बाद अनुष अग्रवाल और सुदीप्ति हजेला ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया।

याचिकाकर्ताओं का दावा है कि चयन प्रक्रिया में निर्धारित मानदंडों का पालन नहीं किया गया और योग्य होने के बावजूद उन्हें टीम से बाहर रखा गया। वहीं संबंधित खेल प्राधिकरण का कहना है कि चयन पूरी तरह नियमों और खिलाड़ियों के प्रदर्शन के आधार पर किया गया है।

कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यह मामला केवल दो खिलाड़ियों के चयन तक सीमित नहीं है, बल्कि राष्ट्रीय खेलों में चयन प्रक्रिया की पारदर्शिता और निष्पक्षता से भी जुड़ा है। ऐसे मामलों में अदालत आमतौर पर तभी हस्तक्षेप करती है जब चयन प्रक्रिया में स्पष्ट अनियमितता या नियमों के उल्लंघन के पर्याप्त प्रमाण सामने आते हैं।

अब खेल जगत की निगाहें सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई पर टिकी हैं। अदालत का फैसला भारतीय घुड़सवारी टीम के अंतिम गठन और एशियन गेम्स 2026 की तैयारियों पर महत्वपूर्ण प्रभाव डाल सकता है।


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