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बांग्लादेश: राम मूर्ति का निर्माण शुरू करने वाले हरिदास गिरफ्तार, भारत ने कहा- चरमपंथियों पर लगाएं लगाम

ढाका, बांग्लादेश:

बांग्लादेश में 81 फीट ऊंची भगवान राम की प्रतिमा के निर्माण की पहल करने वाले हिंदू युवक हरिदास तरोनी को मनी लॉन्ड्रिंग के आरोप में गिरफ्तार किए जाने के बाद नया विवाद खड़ा हो गया है। इस गिरफ्तारी को लेकर बांग्लादेश के हिंदू संगठनों ने कड़ी आपत्ति जताई है, वहीं भारत ने भी बांग्लादेश सरकार से अल्पसंख्यकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने और कट्टरपंथी तत्वों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने की अपील की है।

बांग्लादेश हिंदू-बौद्ध-ईसाई एकता परिषद के महासचिव मणींद्र कुमार नाथ ने हरिदास तरोनी की गिरफ्तारी की पुष्टि की। उन्होंने बताया कि गैबांधा जिले के पुलिस अधीक्षक से बातचीत में यह जानकारी मिली कि हरिदास को मनी लॉन्ड्रिंग के आरोप में गिरफ्तार किया गया है। पुलिस के अनुसार, उन्हें बांग्लादेश पुलिस के आपराधिक जांच विभाग (सीआईडी) ने राजधानी ढाका के उत्तरा इलाके से हिरासत में लिया।

मणींद्र कुमार नाथ ने गिरफ्तारी की आलोचना करते हुए कहा कि सरकार को उन कट्टरपंथी तत्वों के खिलाफ कार्रवाई करनी चाहिए, जो लगातार धार्मिक तनाव फैलाने का प्रयास कर रहे हैं। उनका कहना था कि सामाजिक और धार्मिक सद्भाव बनाए रखने वाले लोगों को निशाना बनाना उचित नहीं है।

हरिदास तरोनी उस समय चर्चा में आए थे, जब उन्होंने उत्तरी बांग्लादेश के गैबांधा जिले में 81 फीट ऊंची भगवान राम की प्रतिमा के निर्माण का कार्य शुरू किया था। यह पहल उस समय सामने आई थी, जब भगवान राम की एक तस्वीर के कथित अपमान को लेकर हिंदू समुदाय में व्यापक विरोध प्रदर्शन हुए थे। इन घटनाओं के बाद इलाके में धार्मिक तनाव भी देखने को मिला था।

इस पूरे घटनाक्रम पर भारत ने भी चिंता व्यक्त की है। 23 जून को भारत के विदेश मंत्रालय ने बांग्लादेश सरकार से अपील की थी कि वह कट्टरपंथी इस्लामी संगठनों के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई करे और देश में रहने वाले हिंदू सहित सभी अल्पसंख्यक समुदायों की सुरक्षा सुनिश्चित करे।

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने नई दिल्ली में आयोजित मीडिया ब्रीफिंग के दौरान कहा कि भारत ने बांग्लादेश में हिंदू देवी-देवताओं और धार्मिक प्रतीकों के अपमान से जुड़ी घटनाओं की रिपोर्ट देखी है। उन्होंने कहा कि ऐसी घटनाएं चिंता का विषय हैं और इससे सामाजिक सौहार्द प्रभावित होता है। भारत को उम्मीद है कि बांग्लादेश सरकार चरमपंथी तत्वों पर प्रभावी नियंत्रण करेगी तथा अल्पसंख्यक समुदायों के धार्मिक अधिकारों और सुरक्षा की पूरी गारंटी देगी।

फिलहाल हरिदास तरोनी की गिरफ्तारी के मामले की जांच जारी है। बांग्लादेश सरकार की ओर से अभी तक इस मामले में विस्तृत आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है। वहीं, मानवाधिकार संगठनों और अल्पसंख्यक समुदाय के प्रतिनिधियों की नजर अब इस बात पर है कि जांच किस दिशा में आगे बढ़ती है और सरकार धार्मिक सद्भाव बनाए रखने के लिए क्या कदम उठाती है।

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